Tuesday, September 28, 2010

कामोन वेअल्थ गमेस की नइया

अस्सी हज़ार एक सो हज़ार करोड़ रूपया
पानी की तरह बहाया हुकमरानो  ने
सोचा समझा बेइंतहा लगाया
कहाँ लगा किस काम आया कोई जाने


देश की साख पर बन आई किसको असर हुआ
छुपते छुपाते बघ्ले झांकते सब नाज़ार आये
एक दुसरे पर इल्जामो की झड़ी लगती रही
 इतने में तो एक नया शहर बस जाता

 आम आदमी पिस्ता रहा रोता रहा     
 आँसू बरसात और सैलाब में बह गए
हर सीने में पीड़ा है पेट सब का भूखा है
 पर कमाल है यह क्रीड़ा 


 कभी पुल गिरता है कभी छतें गिरती  हैं
 यह दिल्ली है मेरे भाई यहाँ हर आह बिकती है
बचे धूल में खेले जहाँ स्ताडियम बनते हैं 
कभी आंधी कभी सैलाब से लड़ते हैं

 
शीला जी कलमाडी भानूत और गिल
 सब अपने घरों में बैठ कर नोट गिनते रहे
 देश को दाव पर लगा चैन लेते रहे
 कितना आसान है सभ पर पानी बहा देना


 विष्व का हर देश आँखे दिखाता है
  गोरी चमड़ी वाले यहाँ कर नचाते हैं
 हिन्दुस्तानी क्या जाने अतिथी के स्वागत को
  अतिथी देवो भावो का ठहाका लगते हैं


 इनसे  सीखो देश को कैसे बदनाम करते हैं 
  क्या जाने इज़्ज़त क्या है आज के हुकाम्राना 
 कभी देखा होता भगत सिंह, गाँधी, तिलक को तो
 जान पाते देश पर जान कैसे लुटाते हैं

 पैसा क्या जो मिट्टी में सभ कुछ मिला देता
  कहीं दिवाली कहीं ईद बना देता
दिखलाया हमने विष्व भर को ये
 हम बोलते बहुत हैं  करते नहीं कुछ भी

 काम चोरों की चाल देख कर
भगवान् ने भी मुह मोड़ा
इस भले देश का उसने भी  साथ  छोड़ा
देश की तकलीफें और बड़ा दी है

चाहता वह भी था भूखों का साथ देना
 अपनी इस चाह में उनको ही सताया था
 चारों  तरफ जलथल उसने बनाया था
 जागो सोओ  मत  मेहनत की बेला है


 कहीं  डेंगू कहीं फ्लू कहीं मलेरिया फैला है
 चारों तरफ मछर पनपते नज़र आये
सफाई क्या होती है जिनको हमने सिखलाया
वह ही आज हम को कसीदे कसते नज़र आये


 कितने मरे कितने हस्पतालो में पड़े
हुकमरानों के पेट फिर भी ना भरे
 आओ देखें हश्र क्या इन खेलों का
 जो इज़्ज़त बढाने की जगह देश से खिलवाड़ कर गए.

Sunday, September 26, 2010

MEDITATIONAL LIGHT

Deep  in  my  thoughts 
A  vacuum surrounds me
The  peace  is  there
The  quiet  is  there
When  the  light  surrounds me.


I love  being  with  myself
Deep  in  my  thought
A  tranquility  surrounds  me
With  light  all  around  me

I  love  everyone
I  love  everything
Trying  to  tell every  soul
That  the  light  surrounds  me


No  desire  to  conquer
No  art  to  master
No  depths  to  be  dug
No  heights  to  reach
And  the  light surrounds me


The  longing  is  gone
The  whining  is  gone
The  power  is  there
The  brightness is  there
When  the  light  surrounds  me !

MEDITATIONAL FLASH

 


 I  was here I was there

I   was here there everywhere
                                                        
Where was I 

When I was not there.